Wednesday, 21 September 2016

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प्यास ऐसी की पी जाऊ आँखे तेरी ! नसीब ऐसा की हासिल जहर भी नहीं !! बे ग़र्ज वफाए कोई हमसे पूछे…! जिसे टूट के चाहा उसे खबर भी नहीं...

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